कभी तो इन्केशाफ़ हो, सराब है, कि तूर है


कभी तो इन्केशाफ़ हो, सराब है, कि तूर है
फ़ज़ा ए दिल में आज कल बसा हुआ जो नूर है

ये मसलेहत की साज़िशें, नसीब की इनायतें
 हयात की नवाज़िशें, जो पास है, वो दूर है

दलील है कि आरज़ू का बाग़ है हरा अभी
जो दिल के संगलाख़ से गुलाब का ज़हूर है

मिली है रौशनी, तो फिर बढ़ेगी ताब ए दीद भी
अभी से दीद का कहाँ निगाह को शऊर है

जो आरज़ू है जुर्म तो हमें भी ऐतराफ़ है
ख़ता है तो ख़ता सही, जो है, तो फिर हुज़ूर, है

लिए चली ये बेख़ुदी हमें तो आसमान पर
निगाह ओ दिल हैं पुरफुसूं, ये इश्क़ का सुरूर है

छुपाए लाख राज़ तू, सिले हों तेरे लब मगर
तेरी निगाह कह गई, कि कुछ न कुछ ज़रूर है

अगर मेरी वफ़ाओं पर तू "नाज़ाँ" है, तो जान ए जाँ
मुझे भी ऐतराफ़ है, कि तू मेरा ग़ुरूर है 


kabhi to inkeshaaf ho, saraab hai ki toor hai 
fazaa-e-dil meN aaj kal basaa hua jo noor hai 

ye maslehat kee saazisheN, naseeb kee inaayateN 
hayaat kee nawaazisheN, jo paas hai wo door hai 

daleel hai ki aarzoo ka baagh hai hara abhi 
jo dil ke sanglaakh se gulaab ka zahoor hai 

mili hai raushni to phir badhegi taab-e-deed bhi 
abhi se deed ka kahaN nigaah ko shaoor hai 

jo aarzoo hai jurm to hameN bhi aitraaf hai
khata hai to khata sahi, jo hai to phir huzoor hai 

liye chali ye bekhudi hameN to aasmaan par 
nigaah-o-dil haiN pur fusooN ye ishq ka suroor hai

chhupaae laakh raaz tu sile hoN tere lab magar 
teri nigaah kah gai ki kuchh n kuchh zaroor hai 

agar meri wafaaoN par tu "naazaaN" hai to jaan-e-jaaN
mujhe bhi aitraaf hai ki tu mera ghuroor hai 

Comments

Popular posts from this blog

फ़र्श था मख़मल का, लेकिन तीलियाँ फ़ौलाद की

भड़कना, कांपना, शो'ले उगलना सीख जाएगा

किरदार-ए-फ़न, उलूम के पैकर भी आयेंगे