ख़ाक हो जाउंगी माना कि बिखर जाऊँगी


ख़ाक हो जाउंगी माना कि बिखर जाऊँगी
मलगुजे वक़्त में कुछ रंग तो भर जाऊँगी  

जलते सहराओं से कर रक्खी है यारी मैं ने
प्यास के सामने अब सीना सिपर जाऊँगी  

एक इक कर के अलग हो गईं राहें सब की
और मैं सोच रही हूँ कि किधर जाऊँगी

हद्द--बीनाई मेरे साथ ही चलती है मगर
जुस्तजू में तेरी ता हद्द--नज़र जाऊँगी  

जाने किस रूप में अब वक़्त मुझे ढालेगा
मैं जो टूटी हूँ तो कुछ और सँवर जाऊँगी

दिल के वीराने में उतरे हैं ग़मों के साए
तीरगी फैलेगी कुछ और तो डर जाऊँगी  

बारहा उभरूँगी मैं इक नए सूरज की तरह
"कौन कहता है कि मौत आई तो मर जाऊँगी"

बढ़ता जाएगा जो "मुमताज़" ये वहशत का हिसार
डर के ख़ुद अपने अँधेरों में उतर जाऊँगी  

خاک  ہو  جاؤنگی, مانا  کہ  بکھر  جاؤنگی
ملگجے  وقت  میں  کچھ  رنگ  تو  بھر  جاؤنگی

جلتے  صحراؤں  سے  کر  رکھی   ہے  یاری  میں  نے
پیاس  کے  سامنے  اب  سینہ  سپر  جاؤنگی

ایک اک کر  کے  الگ  ہو  گئیں  راہیں  سب  کی
اور  میں  سوچ  رہی  ہوں  کہ  کدھر  جاؤنگی

حد_بینائی  مرے  ساتھ  ہی  چلتی  ہے  مگر
جستجو  میں  تری  تا  حد_نظر  جاؤنگی

جانے  کس  روپ  میں  اب  وقت  مجھے  ڈھالیگا
میں  جو  ٹوٹی  ہوں  تو  کچھ  اور  سنور  جاؤنگی

دل  کے  ویرانے  میں  اترے  ہیں  غموں  کے  سائے 
تیرگی  پھیلیگی  کچھ  اور  تو  ڈر  جاؤنگی

بارہا  ابھرونگی  میں  اک  نئے سورج  کی  طرح
" کون  کہتا  ہے  کہ  موت  آئ  تو  مر  جاؤنگی "

بڑھتا  جائیگا  جو  "ممتاز " یہ  وحشت  کا  حصار
ڈر کے  خود  اپنے  اندھیروں  میں  اتر  جاؤنگی


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