परों की कह्कशाओं तक रसानी देखते जाओ


परों की कह्कशाओं तक रसानी देखते जाओ
जुनूँ की आँधियों पर हुक्मरानी देखते जाओ

बिखरती है जो माज़ी की निशानी, देखते जाओ
कभी अजदाद की कुटिया पुरानी देखते जाओ

बरहना शाख़ पर हसरत की इक कोंपल उभरती है
ख़िज़ाँ पर कैसे आती है जवानी, देखते जाओ

मकीं है मुफ़लिसी अब उस हवेली की फ़सीलों में
तो अब गिरती हैं क़दरें खानदानी, देखते जाओ

अभी तक तो किताब--ज़ीस्त के औराक़ सादा हैं
लिखेगा वक़्त इन पर क्या कहानी, देखते जाओ

निज़ाम--तख़्त--शाही पारा पारा है, मगर फिर भी
अमीर--शहर की ये लन्तरानी देखते जाओ

मेरी गुफ़्तार की बेबाकी से तुम को शिकायत थी
"कफ़न सरकाओ, मेरी बेज़ुबानी देखते जाओ"

क़लम में बहते दरियाओं ने डेरा डाल रक्खा है
जो है "मुमताज़" शेरों में रवानी, देखते जाओ


پروں  کی  کہکشاؤں  تک  رسانی  دیکھتے  جاؤ
جنوں  کی  آندھیوں  پر  حکمرانی  دیکھتے  جاؤ

بکھرتی  ہے  جو  ماضی  کی  نشانی , دیکھتے  جاؤ
کبھی  اجداد  کی  کٹیا  پرانی  دیکھتے  جاؤ

برہنہ  شاخ  پر  حسرت  کی  اک  کونپل  ابھرتی  ہے
خزاں  پر  کیسے  آتی  ہے  جوانی , دیکھتے  جاؤ

مکین  ہے  مفلسی  اب  اس  حویلی  کی  فصیلوں  میں
تو  اب  گرتی  ہیں  قدریں  خاندانی , دیکھتے  جاؤ

ابھی  تک  تو  کتاب_زیست  کے  اوراق  سادہ  ہیں
لکھیگا  وقت  ان  پر  کیا  کہانی , دیکھتے  جاؤ

نظام_تخت_شاہی  پارہ  پارہ  ہے , مگر  پھر  بھی
امیر_ شہر  کی  یہ  لنترانی  دیکھتے  جاؤ

مری گفتار  کی  بیباکی  سے  تم  کو  شکایت  تھی
"کفن  سرکاؤ , میری  بیزبانی  دیکھتے  جاؤ"

قلم  میں  بہتے  دریاؤں  نے  ڈیرہ  ڈال  رکّھا  ہے
جو  ہے  "ممتاز " شعروں  میں  روانی, دیکھتے  جاؤ


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