जो दिल को क़ैद किये है हिसार, किस का है


जो दिल को क़ैद किये है हिसार, किस का है
शऊर--दीद पे आख़िर ग़ुबार किस  का  है

करेंगे हम भी तनासुब  तो  सब्र का  लेकिन
ये तुम भी सोच लो परवरदिगार किस का  है

ये  ज़ख़्म ज़ख़्म  तमन्ना, लहू  लहू  हस्ती
जो दिल में उतरा है सीधा, ये वार किस का है

सलाम करते हैं झुक झुक के गुलसिताँ जिसको
खिला खिला रुख़--रश्क--बहार किस का  है

अज़ल से जिस के 'अक़्क़ुब में है जुनूँ  मेरा
लरज़ता अक्स सराबों के  पार  किस का  है

तराशे जाता है मुझ को ये कौन  सदियों  से
"ये लख़्त लख़्त बदन शाहकार किस  का  है"

हज़ार रेज़ों में बिखरा  दिया  है  हस्ती  को
दिल--फिगार पे 'मुमताज़' वार किस  का  है


جو  دل  کو  قید  کے  ہے , حصار  کس  کا  ہے
شعور_ دید  پہ   آخر  غبار  کس  کا  ہے

کرینگے  ہم  بھی  تناسب  تو  صبر  کا  لیکن
یہ  تم  بھی  سوچ  لو  پروردگار  کس  کا  ہے

یہ  زخم  زخم  تمنا , لہو  لہو  ہستی
جو  دل  میں  اترا  ہے  سیدھا , یہ  وار  کس  کا  ہے

سلام  کرتے  ہیں  جھک  جھک  کے  گلستان  جس  کو
کھلا  کھلا  رخ _ رشک _ بہار  کس  کا  ہے

ازل  سے  جس  کے  تعقب  میں  ہے  جنوں  میرا
لرزتا  عکس  سرابوں  کے  پار  کس  کا  ہے

تراشے  جاتا  ہے  مجھ  کو  یہ  کون  صدیوں  سے
"یہ  لخت  لخت  بدن  شاہکار  کس  کا  ہے "

ہزار  ریزوں  میں  بکھرا  دیا  ہے  ہستی  کو
دل  ے فگار  پہ  'ممتاز ' وار  کس  کا  ہے


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