ग़ज़ल - नूर ये किस का रोज़ चुरा कर लाए है मेहर-ए-ताबाँ

नूर ये किस का रोज़ चुरा कर लाए है मेहर-ए-ताबाँ
रोज़ समंदर की मौजों पर कौन बिखेरे अफ़शाँ
NOOR YE KIS KA ROZ CHURA KAR LAAEY HAI MEHR E TAABA'N
ROZ SAMANDAR KI MAUJO'N PAR KAUN BIKHEREY AFSHAA'N

टूट गए सब प्यार के टाँके ज़ख़्म हुए सब उरियाँ
तेज़ हुई लय दर्द की यारो, हार गया हर दरमाँ
TOOT GAEY SAB PYAR KE TAANKE ZAKHM HUE SAB URIYAA'N
TEZ HUI LAY DARD KI YAARO HAAR GAYA HAR DARMAA'N

रात की तीरा सर्द गली में शोर उठा जब ग़म का
जाग उठा हर दर्द पुराना जाग उठा हर अरमाँ
RAAT KI TEERA SARD GALI ME'N SHOR UTHA JAB GHAM KA
JAAG UTHA HAR DARD PURAANA JAAG UTHA HAR ARMAA'N

इश्क़ की बाज़ी, जान का सौदा, दाग़, सितम, रुसवाई
चार क़दम दुश्वार है चलना राह नहीं ये आसाँ
ISHQ KI BAAZI, JAAN KA SAUDA, DAAGH, SITAM, RUSWAAI
CHAAR QADAM DUSHWAAR HAI CHALNA, RAAH NAHI'N YE AASAA'N

जितनी बढ़ी सैलाब की शिद्दत उतना जुनूँ भी मचला
नाव शिकस्ता पार हुई, हैरान खड़ा है तूफ़ाँ
JITNI BADHI SAILAAB KI SHIDDAT, UTNA JUNOO'N BHI MACHLA
NAAV SHIKASTA PAAR HUI, HAIRAAN KHADA HAI TOOFAA'N

ख़ास हुई इख़लास की ज़ौ फिरती है वफ़ा आवारा
इश्क़ भी है इफ़रात में हासिल और हैं दिल भी अरज़ाँ
KHAAS HUI IKHLAAS KI ZAU, PHIRTI HAI WAFA AAWAARA
ISHQ BHI HAI IFRAAT ME'N HAASIL, AUR HAIN DIL BHI ARZAA'N

जीत गया तू हार के भी हर दाँव शिकस्त-ए-दिल का
हार गए हम जीत के भी पिनदार की बाज़ी जानाँ
JEET GAYA TU HAAR KE BHI HAR DAANV SHIKAST E DIL KA
HAAR GAEY HAM JEET KE BHI PINDAAR KI BAAZI JAANA'N

आज क़फ़स को आग लगा दे दिल की चिंगारी से
तोड़ दे हर ज़ंजीर गिरा दे अब दीवार-ए-ज़िन्दाँ
AAJ QAFAS KO AAG LAGA DE DIL KI CHINGAARI SE
TOD DE HAR  ZANJEER GIRA DE AAJ DIWAAR E ZINDAA'N

ख़्वाब सराबों के देखूँ अब नींद से भी ख़ौफ़ आए
आँख है प्यासी, होंट हैं तशना, दिल महबूब का ख़्वाहाँ
KHWAAB SARAABO'N KE DEKHU'N, AB NEEND SE BHI KHAUF AAEY
AANKH HAI PYAASI, HONT HAIN TASHNA, DIL MEHBOOB KA KHWAAHA'N

आज हुआ मुमताज़ मुकम्मल इश्क़ का वो अफ़साना
टूट गई ज़ंजीर वफ़ा की तंग हुई जब जौलाँ
AAJ HUA 'MUMTAZ' MUKAMMAL ISHQ KA WO AFSAANA
TOOT GAI ZANJEER WAFAA KI TANG HUI JAB JAULAA'N
मेहर-ए-ताबाँ चमकदार सूरज, अफ़शाँ glitter, उरियाँ नंगा, दरमाँ इलाज, इख़लास सच्ची मोहब्बत, ज़ौ रौशनी, इफ़रात बहुतायत,  अरज़ाँ सस्ता, शिकस्त-ए-दिल दिल की हार, पिनदार प्रतिष्ठा, क़फ़स पिंजरा, ज़िन्दाँ क़ैदख़ाना, सराबों के मरीचिकाओं के, ख़्वाहाँ इच्छुक, मुकम्मल पूरा, जौलाँ बेड़ी

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