ग़ज़ल - दो जागी सोई हुई सी आँखों का ख़्वाब था वो

 दो जागी सोई हुई सी आँखों का ख़्वाब था वो
मेरी तमन्नाओं के फ़ुसूँ का जवाब था वो
DO JAAGI SOI HUI SI AANKHO'N KA KHWAAB THA WO
MERI TAMANNAO'N KE FUSOO'N KA JAWAAB THA WO

हर इक अँधेरे का, रौशनी का हिजाब था वो
हमारी हस्ती के राज़-ए-पिन्हाँ का बाब था वो
HAR IK ANDHERE KA RAUSHNI KA HIJAAB THA WO
HAMAARI HASTI KE RAAZ E PINHAA'N KA BAAB THA WO

अता किए थे तमाम कर्ब-ओ-मलाल दिल को
जो मुझ पे नाज़िल हुआ था ऐसा अज़ाब था वो
ATAA KIYE THE TAMAAM KARB O MALAAL DIL KO
JO MUJH PE NAAZIL HUA THA AISA AZAAB THA WO

था दिल की दुनिया की सल्तनत का वो शाहज़ादा
मोहब्बतों की खुली हुई इक किताब था वो
THA DIL KI DUNIYA KI SALTNAT KA WO SHAAHZAADA
MOHABBATO'N KI KHULI HUI IK KITAAB THA WO

क़रीबतर था, मगर रहा कितने फ़ासले पर
जहान-ए-हसरत की सरज़मीं का सराब था वो
QAREEB TAR THA MAGAR RAHA KITNE FAASLE PAR
JAHAAN E HASRAT KI SARZAMEE'N KA SARAAB THA WO

हर एक ख़्वाब-ए-फ़ुसूँ की ताबीर बन के आया
हयात कितनी हसीं थी जब हमरक़ाब था वो
HAR EK KHWAAB E FUSOO'N KI TAABEER BAN KE AAYA
HAYAAT KITNI HASEE'N THI JAB HAMRAQAAB THA WO

न हम ने आवाज़ दी न उसने पलट के देखा
हमें कहाँ इल्म था कि दौर-ए-शबाब था वो
NA HAM NE AAWAAZ DI NA US NE PALAT KE DEKHA
HAME'N KAHA'N ILM THA KE DAUR E SHABAAB THA WO

कि पत्ती पत्ती बिखर गई थी हवा में उसकी
गई रुतों में खिला था ऐसा गुलाब था वो
KE PATTI PATTI BIKHAR GAI THI HAWAA ME'N US KI
GAI RUTO'N ME'N KHILA THA AISA GULAAB THA WO

किसी सितम की भी उसके मुमताज़ हद नहीं थी
मेरी हर इक मात से सदा कामयाब था वो
KISI SITAM KI BHI US KE 'MUMTAZ' HAD NAHI'N THI
MERI HAR IK MAAT SE SADAA KAAMYAAB THA WO


फ़ुसूँ - जादू, हिजाब पर्दा, पिन्हाँ छुपा हुआ, बाब दरवाज़ा, कर्ब दर्द, अज़ाब यातना, सराब मरीचिका, हयात जीवन, हमरक़ाब साथ, इल्म ज्ञान, दौर-ए-शबाब जवानी का ज़माना 

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