ग़ज़ल - मसर्रतों की ज़मीं पर ये कैसी शबनम है


मसर्रतों की ज़मीं पर ये कैसी शबनम है
ग़ुबार कैसा है सीने में, मुझ को क्या ग़म है
MASARRATO'N KI ZAMEE'N PAR YE KAISI SHABNAM HAI
GHUBAAR KAISA HAI SEENE ME'N, MUJH KO KYA GHAM HAI

क़दम क़दम पे बिछे हैं हज़ारों ख़ार यहाँ
ज़रा संभल के चलो, रौशनी अभी कम है
QADAM QADAM PE BICHHE HAI'N HAZAARO'N KHAAR YAHA'N
ZARA SAMBHAL KE CHALO, ROSHNI ABHI KAM HAI

ज़रा जो हँसने की कोशिश की, आँख भर आई
शगुफ़्ता ख़ुशियों पे महरूमियों का मौसम है
ZARAA JO HANSNE KI KOSHISH KI, AANKH BHAR AAI
SHAGUFTAA KHUSHIYO'N PE MEHROOMIYO'N KA MAUSAM HAI

थकी थकी सी तमन्ना, उदास उदास उम्मीद
बुझा बुझा सा कई दिन से दिल का आलम है
THAKI THAKI SI TAMANNA, UDAAS UDAAS UMMEED
BUJHA BUJHA SA KAI DIN SE DIL KA AALAM HAI

जलन से तपने लगी है फ़ज़ा-ए-सहरा-ए-दिल
हर एक साँस मेरी ज़िन्दगी का मातम है
JALAN SE TAPNE LAGI HAI FIZAA E SEHRA E DIL
HAR EK SAANS MERI ZINDGI KA MAATAM HAI

खिली खिली सी हँसी पर जमी जमी सी ख़लिश
तरब के ज़ख़्म पे ख़ुशफ़हमियों का मरहम है
KHILI KHILI SI HANSI PAR JAMI JAMI SI KHALISH
TARAB KE ZAKHM PE KHUSHFEHMIYO'N KA MARHAM HAI

अभी है क़ैद में ख़ुशबू, हैं रंग आवारा
अभी बहार परेशाँ है, ज़ीस्त बरहम है
ABHI HAI QAID ME'N KHUSHBOO, HAI'N RANG AAWAARA
ABHI BAHAAR PARESHAA'N HAI ZEEST BARHAM HAI

नज़र में डूबती जाती हैं रौशनी की लवें
यक़ीनन आज सितारों की आँख भी नम है
NAZAR ME'N DOOBTI JAATI HAI'N ROSHNI KI LAVE'N
YAQEENAN AAJ SITAARO'N KI AANKH BHI NAM HAI

चमन चमन पे उदासी, शजर शजर ग़मगीं
हर एक शाख़ पे मुमताज़ ज़र्द परचम है
CHAMAN CHAMAN PE UDAASI, SHAJAR SHAJAR GHAMGEE'N
HAR EK SHAAKH PE 'MUMTAZ' ZARD PARCHAM HAI


मसर्रत ख़ुशी, ख़ार काँटा, शगुफ़्ता खिला हुआ, ख़लिश चुभन, तरब ख़ुशी, शजर पेड़, ज़र्द पीला, परचम झण्डा 

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