नज़्म - तसव्वर


तू कोई रंग है कि ख़ुश्बू है
तू कोई ख़्वाब है कि साया है
मेरी तनहाई के अँधेरों में
जाने कितनी शोआएँ लाया है
TU KOI RANG HAI KE KHUSHBOO HAI
TU KOI KHWAAB HAI KE SAAYA HAI
MERI TANHAAI KE ANDHERON MEN
JAANE KITNI SHOAAEN LAAYA HAI

मेरे बिखरे वजूद की किरचें
फिर चमक उठ्ठीं कहकशाँ की तरह
मेरे अंदर वही तलातुम है
फिर किसी बहर-ए-बेकराँ की तरह
MERE BIKHRE WAJOOD KI KIRCHEN
PHIR CHAMAK UTTHIN KEHKASHAA.N KI TARAH
MERE ANDER WAHI TALAATUM HAI
PHIR KISI BEHR E BEKARAA.N KI TARAH

फिर तमाज़त का वो ही आलम है
दिल में फिर कोई आफ़ताब उठा
जिस्म का रेज़ा रेज़ा जल उट्ठा
रूह से फिर कोई शेहाब उठा  
PHIR TAMAAZAT KA WO HI AALAM HAI
DIL MEN PHIR KOI AAFTAAB UTHA
JISM KA REZA REZA JAL UTTHA
ROOH SE PHIR KOI SHEHAAB UTHA

फिर हुई सुब्ह, फिर वो जाग उठी
ज़िन्दगी ले रही है अंगड़ाई
मेरी क़िस्मत के वीराँ ख़ाने में
फिर से होती है बज़्म आराई
PHIR HUI SUBH, PHIR WO JAAG UTHI
ZINDAGI LE RAHI HAI ANGDAAI
MERI QISMAT KE VEERAA.N KHAANE MEN
PHIR SE HOTI HAI BAZM AARAAI

तसव्वर के रंगीं शहज़ादे
आ नज़र भर के तुझ को देख तो लूँ
ये हसीं ख़्वाब, धनक रंग ख़याल
इस तसव्वर को क्या तख़ातुब दूँ
AYE TASAWWAR KE ZARREE.N SHEHZAADE
AA NAZAR BHAR KE TUJH KO DEKH TO LOON
YE HASEE.N KHWAAB DHANAK RANG KHAYAAL
IS TASAWWAR KO KYA TAKHAATUB DOON
शोआएँ किरणें, कहकशाँ आकाशगंगा, तलातुम तूफ़ान, बहर-ए-बेकराँ अथाह सागर, तमाज़त गर्मी, आफ़ताब सूरज, रेज़ा रेज़ा कण कण, शेहाब आग का गोला, बज़्म आराई महफ़िल सजाना, तसव्वर कल्पना, धनक रंग इंद्रधनुषी, तख़ातुब पुकारने का नाम

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