ग़ज़ल - धड़कने के लिए दिल को तेरा एहसास काफ़ी है

धड़कने के लिए दिल को तेरा एहसास काफ़ी है
मेरे जीने को तेरे प्यार की बू-बास काफ़ी है
DHADAKNE KE LIYE DIL KO TERA EHSAAS KAAFI HAI
MERE JEENE KO TERE PYAR KI BU-BAAS KAAFI HAI

बहल जाएगा दिल उम्मीद के रंगीं खिलौने से
कभी बदलेगी क़िस्मत भी यही इक आस काफ़ी है
BAHEL JAAEGA DIL UMMEED KE RANGEE.N KHILONE SE
KABHI BADLEGI QISMAT BHI YAHI IK AAS KAAFI HAI

मोहब्बत कुछ, अदावत कुछ, ज़रा सी बदगुमानी भी
मुझे ख़ुशियों से क्या लेना, यही इक यास काफ़ी है
MOHABBAT KUCHH ADAAWAT KUCHH ZARA SI BADGUMAANI BHI
MUJHE KHUSHIYON SE KYA LENA YAHI IK YAAS KAAFI HAI

कमी कोई न हो तो हसरतें वीरान हो जाएँ
ग़िना का मोल तय करने को बस इफ़लास काफ़ी है
KAMI KOI NA HO TO HASRATEN VEERAAN HO JAAEN
GHINA KA MOL TAY KARNE KO BAS IFLAAS KAAFI HAI

तरब का ख़ून करने को बहुत है तेरा ग़म जानाँ
जिगर को काटने को एक ही अलमास काफ़ी है
TARAB KA KHOON KARNE KO BAHOT HAI TERA GHAM JAANA.N
JIGAR KO KAATNE KO EK HI ALMAAS KAAFI HAI

जिन्हें तकमील करने में गुज़र जाएँ कई सदियाँ
तमन्नाओं की वो दौलत हमारे पास काफ़ी है
JINHEN TAKMEEL KARNE MEN GUZAR JAAEN KAI SADIYAAN
TAMANNAON KI WO DAULAT HAMAARE PAAS KAAFI HAI

तुम्हारी बेवफ़ाई, मेरा ग़म, मुमताज़ मैं तन्हा
दबी है दिल के गोशे में कहीं इक आस, काफ़ी है
TUMHARI BEWAFAAI, MERA GHAM, 'MUMTAZ' MAIN TANHA
DABI HAI DIL KE GOSHE MEN KAHIN IK AAS, KAAFI HAI


बू-बास सुराग़, निशान, अदावत दुश्मनी, बदगुमानी ग़लतफ़हमी, यास उदासी, ग़िना अमीरी, इफ़लास ग़रीबी, तरब ख़ुशी, अलमास हीरा, तकमील पूरा, गोशा कोना 

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