ग़ज़ल - आज सारे क़ुसूर हो जाएँ

आज सारे क़ुसूर हो जाएँ
जमअ अब सब फ़ितूर हो जाएँ
AAJ SAARE QUSOOR HO JAAEN
JAMAA AB SAB FITOOR HO JAAEN

क़ुर्बतें बोझ हो गईं जानाँ
अब ख़मोशी से दूर हो जाएँ
QURBATEN BOJH HO GAIN JAANA.N
AB KHAMOSHI SE DOOR HO JAAEN

इन्क़िसारी से होगा हासिल क्या
अब सरापा ग़ुरूर हो जाएँ
INQISAARI SE HOGA HAASIL KYA
AB SARAAPA GHUROOR HO JAAEN

अद्ल की लाज आज रह जाए
क़त्ल हम बेक़ुसूर हो जाएँ
ADL KI LAAJ AAJ REH JAAE
QATL HAM BEQUSOOR HO JAAEN

अब ये हसरत है हसरतें सारी
लुक़मा-ए-लाशऊर हो जाएँ
AB YE HASRAT HAI HASRATEN SAARI
LUQMA E LAASHAOOR HO JAAEN

इश्क़ मासूम है चलो माना
कुछ ख़ताएँ ज़रूर हो जाएँ
ISHQ MAASOOM HAI CHALO MAANA
KUCHH KHATAAEN ZAROOR HO JAAEN

ज़र्ब ऐसी पड़े हक़ीक़त की
ख़्वाब सब चूर चूर हो जाएँ
ZARB AISI PADE HAQEEQAT KI
KHWAAB SAB CHOOR CHOOR HO JAAEN

इतना तप जाएँ हर अज़ीयत में
ख़ुद ही मुमताज़ नूर हो जाएँ
ITNA TAP JAAEN HAR AZEEAT MEN
KHUD HI 'MUMTAZ' NOOR HO JAAEN



जमअ इकट्ठा, क़ुर्बतें नज़दीकियाँ, इन्किसारी बहुत झुक कर मिलना, सरापा सर से पाँव तक, अद्ल न्याय, हसरत इच्छा, लुक़मा कौर, लाशऊर - अचेतन, ज़र्ब चोट, अज़ीयत तकलीफ़

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