ग़ज़ल - हलावत होती है थोड़ी सी नफ़रत की मोहब्बत में


हलावत होती है थोड़ी सी नफ़रत की मोहब्बत में
बड़ी बारीक सरहद है मोहब्बत और नफ़रत में
HALAAWAT HOTI HAI THODI SI NAFRAT KI MOHABBAT MEN
BADI BAAREEK SARHAD HAI MOHABBAT AUR NAFRAT MEN

न तेरे इश्क़ की बुनियाद ही गहरी रही इतनी
न हम ख़ुद को भुला पाए तेरी आँखों की चाहत में
NA TERE ISHQ KI BUNIYAAD HI GEHRI RAHI ITNI
NA HAM KHUD KO BHULA PAAE TERI AANKHON KI CHAAHAT MEN

तेरे इल्ज़ाम से हस्ती मेरी मैली नहीं होगी
पशेमानी घुली है तेरी इस नाकाम तोहमत में
TERE ILZAAM SE HASTI MERI MAILI NAHIN HOGI
PASHEMAANI GHULI HAI TERI IS NAAKAAM TOHMAT MEN

हर इक शय महंगी है बस सिर्फ़ इक इंसान सस्ता है
मोहब्बत बिकती है यारो यहाँ कौड़ी की क़ीमत में
HAR IK SHAY MEHNGI HAI BAS SIRF IK INSAAN SASTA HAI
MOHABBAT BIKTI HAI YAARO YAHAN KAUDI KI QEEMAT MEN

सभी औज़ार अपने तेज़ कर ले ऐ मेरे क़ातिल
मज़ा आने लगा है अब हमें तेरी अदावत में
SABHI AUZAAR APNE TEZ KAR LE AYE MERE QAATIL
MAZAA AANE LAGA HAI AB HAMEN TERI ADAAVAT MEN

कोई रंगीन गुल भोली मगस को खा भी सकता है
छुपी हैं कितनी ही ऐयारियाँ फूलों की निकहत में
KOI RANGEEN GUL BHOLI MAGAS KO KHA BHI SAKTA HAI
CHHUPI HAIN KITNI HI AIYAARIYAN PHOOLON KI NIKHAT MEN

जिरह होगी अभी, तब जा के कोई फ़ैसला होगा
अभी तो मुद्दआ आया है ये दिल की अदालत में
JIRAH HOGI ABHI TAB JAA KE KOI FAISLA HOGA
ABHI TO MUDDA'AA AAYA HAI YE DIL KI ADAALAT MEN

चलो अच्छा हुआ, आँखें खुलीं, ये ख़्वाब तो टूटा
बड़ी बेचैनियाँ थीं इस तेरी रंगीन राहत में
CHALO ACHHA HUA AANKHEN KHULIN YE KHWAAB TO TOOTA
BADI BECHAINIYAAN THIN IS TERI RANGEEN RAAHAT MEN

पुरानी राह को मुड़ कर कभी देखा नहीं हमने
है ऐसा रंग भी मुमताज़ कुछ अपनी तबीयत में
PURAANI RAAH KO MUD KAR KABHI DEKHA NAHIN HAM NE
HAI AISA RANG BHI 'MUMTAZ' KUCHH APNI TABEEAT MEN

हलावत मिठास, पशेमानी पछतावा, तोहमत आरोप, अदावत दुश्मनी, गुल फूल, मगस मक्खी, ऐयारियाँ मक्कारियाँ, निकहत ख़ुशबू



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