ग़ज़ल - मुक़द्दर से ये अबके बार दिल जो जंग हारा है

मुक़द्दर से ये अबके बार दिल जो जंग हारा है
तमन्ना रेज़ा रेज़ा है, मोहब्बत पारा पारा है
MUQADDAR SE YE AB KE BAAR DIL JO JANG HAARA HAI
TAMANNA REZA REZA HAI MOHABBAT PARA PARA HAI

बड़ी मेहनत से जश्न-ए-आरज़ू के वास्ते जानाँ
तेरी यादों से मैं ने दिल की गलियों को सँवारा है
BADI MEHNAT SE JASHN E AARZOO KE WAASTE JAANAN
TERI YAADON SE MAIN NE DIL KI GALIYON KO SANWAARA HAI

पिये जाते है हम कब से समंदर अश्क का लेकिन
मिटेगी तिश्नगी कैसे, ये पानी भी तो खारा है
PIYE JAATE HAIN KAB SE HAM SAMANDAR ASHK KA PHIR BHI
MITEGI TASHNAGI KAISE YE PAANI BHI TO KHARA HAI

कभी तो आके फिर इक बार वो राहत ज़रा दे दे
तुझे ऐ ज़िन्दगी, दिल की जलन ने फिर पुकारा है
KABHI TO AA KE PHIR IK BAAR WO RAAHAT ZARA DE DE
TUJHE AY ZINDAGI DIL KI JALAN NE PHIR PUKAARA HAI

मुनासिब है अभी हम हौसले अपने बचा रक्खें
भटकती है अभी कश्ती, अभी डूबा किनारा है
MUNASIB HAI ABHI HAM HAUSLE APNE BACHA RAKHEN
BHATAKTI HAI ABHI KASHTI ABHI DOOBA KINAARA HAI

गुज़रता ही नहीं है ज़िन्दगी का एक वो लम्हा
मोहब्बत का वो इक लम्हा जो शोला है, शरारा है
GUZARTA HI NAHIN HAI ZINDAGI KA EK WO LAMHAA
MOHABBAT KA WO IK LAMHAA JO SHOLA HAI SHARARA HAI

मचलते रंग हैं मुमताज़ जिसमें ज़िंदगानी के
तुम्हारी इक नज़र जानाँ मेरे दिल का सहारा है
MACHALTE RANG HAIN 'MUMTAZ' JIS MEN ZINDAGAANI KE
TUMHARI IK NAZAR JAANAN MERE DIL KA SAHAARA HAI


रेज़ा रेज़ा टुकड़ा टुकड़ा, पारा पारा टुकड़ा टुकड़ा, शरारा अंगारा, तिश्नगी प्यास 

टिप्पणियाँ

  1. बहुत ही सुंदर वाह वाह...बेहद प्रभावशाली है....सुन्दर भाव , सुन्दर पंक्तिया........सुन्दर गज़ब की प्रस्तुति.....!

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  2. Wah Wah, Wah Wah !! behtreen ghazal hal, matla to bahut hee achha hai: Muqaddar se ye dil ab ke dafa jo jang haara hai, Tamanna reza reza hai mohabbat para para hai. Bahut shukriya !!

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